दैनिक जागरण

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इस पत्र की स्थापना भारत के महान स्वतंत्रता संग्राम सेनानी शिव प्रसाद गुप्त ने 5 सितम्बर 1920 को की थी। कुछ वर्षों (1943 से 1949 तक) को छोड़कर पण्डित बाबूराव विष्णु पराडकर 1920 से 1955 तक आज के सम्पादक रहे। काशी के बाबू शिवप्रशाद गुप्त हिन्दी में ऐसे दैनिक पत्र की कल्पना लेकर विदेश भ्रमण से लौटे (1919 ई) जो ‘लन्दन टाइम्स’ जैसा प्रभावशाली हो। गुप्तजी ने ज्ञानमण्डल की स्थापना की और 5 सितम्बर 1920 ई. को आज का प्रकाशन हुआ और प्रकाशजी इसके प्रथम सम्पादक बने। तीन दशकों में आज और पराड़करजी ने हिन्दी पत्रकार-कला को नया स्वरूप, नई गति और नई दिशा प्रदान की। दिल्ली से काशी तक अपना हिन्दी दूरमुद्रण यन्त्र लगाने वाला यह पहला पत्र था। लोकमान्य तिलक की प्रेरणा से जन्मा `आज’ महात्मा गाँधी के आन्दोलनों का अग्रदूत बना। सत्यग्रहियों की नामावलियों को छापने का साहस केवल ‘आज’ ने किया। ब्रिटिश शासनकाल में सरकार के कोप व दमन के कारण ‘आज’ का प्रकाशन रुका तो साइक्लोस्टाइल में ‘रणभेरी’ का प्रकाशन कर पराडकरजी ने राष्ट्रीय जागरण की गति को मन्द पड़ने नहीं दिया। ‘आज’ के अग्रलेखों और टिप्पणियों ने आज के महत्त्व को बढ़ाया। ‘आज’ के अग्रलेख लेखकों में सर्वश्री सम्पूर्णानन्द, आचार्य नरेन्द्र देव और श्रीप्रकाश भी थे। पराड़करजी तथा कमलापतिजी के प्रभावी अग्रलेखों ने इस पत्र को हिन्दी का श्रेष्ठ दैनिक बना दिया।

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 April 30, 2020 10:04 am

 May 5, 2020 9:15 am

 

City :  Gaya , Bihar
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जन-समूह के मुक्त स्वर को प्रतिबिम्बित कर सके। प्रथम संस्करण 1942 में झांसी से जारी किया गया। 1947 में इसका मुख्यालय झाँसी से कानपुर ले जाया गया। संस्करण इंदौर जम्मू झाँसी कानपुर लखनऊ लुधियाना मेरठ मुरादाबाद मुजफ्फरपुर पानीपत

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