Chhat Festival in bihar

Nitesh Agrawal Nitesh Agrawal            November 22, 2019 2:57 pm

छठ पूजा: इतिहास, उत्पत्ति और संस्कार के समबन्ध में 10 अद्भुत तथ्य

भारत उपवासों और त्यौहारों का देश है। इसके अलावा यह एकमात्र ऐसा देश है जहाँ आज भी प्राचीन परम्पराएं और संस्कृति मौजूद है। भारत में त्यौहार और प्रकृति का गहरा नाता है। छठ पूजा एक ऐसा त्यौहार है जो दिवाली के एक सप्ताह बाद नदियों के किनारे मनाया जाता है। यह पूजा सूरज देवता को समर्पित है जिस कारण इसे ‘सूर्यषष्ठी’ भी कहते है।

1. छठ पूजा क्यों मनायी जाती है?

यह पूजा सूर्य देवता और छठी मां (षष्ठी मां या उषा) को समर्पित है। इस त्यौहार के जरिये लोग सूर्य देवता, देवी मां उषा (सुबह की पहली किरण) और प्रत्युषा (शाम की आखिरी किरण) के प्रति अपनी कृतज्ञता प्रकट करते हैं। ऐसा इसलिए किया जाता है क्योंकि मान्यता है कि सूरज ऊर्जा का पहला स्रोत है जिसके जरिये पृथ्वी पर जीवन संभव हो पाया है।

2. छठ पूजा से जुड़ी संस्कृति और परम्पराएं (चार दिन का त्यौहार)

यह एक ऐसा त्यौहार है जिसके नियमों को बड़ी सख्ती के साथ पालन किया जाता है। अतः खुद पर संयम व परहेज रखते हुये व्रती सबसे पहले अपने परिवार से अलग होते है ताकि वह अपनी शुद्धता और पवित्रता को बरकरार रख सके। इस त्यौहार में बिना नमक, प्याज, लहसुन आदि के प्रसाद और आहार (श्रद्धालुओं के लिए) बनाए जाते हैं। इस नियम को श्रद्धालुओं को निरंतर 4 दिन तक पालन करना पड़ता है।

3.छठ पूजा का पहला दिन (नहाए खाय/अरवा अरवाइन)

इस दिन व्रती गंगा नदी में स्नान करते हैं या फिर अपने आस पास मौजूद गंगा की किसी सहायक नदी में स्नान करते हैं। व्रती इस दिन सिर्फ एक बार ही खाना खाते हैं, जिसे कड्डू-भात कहा जाता है। यह खाना कांसे या मिट्टी के बर्तन में पकाया जाता है। खाना पकाने के लिए आम की लकड़ी और मिट्टी के चूल्हे का इस्तेमाल किया जाता है।

4. छठ पूजा का दूसरा दिन (लोहंडा और खरना)

इस दिन व्रती पूरे दिन के लिए उपवास रखते है और शाम को रसियो-खीर, पूरी और फलों से सूर्य देवता की पूजा के बाद ही भोजन ग्रहण करते है। इसके बाद अगले 36 घंटों के लिए व्रती निर्जला व्रत रखते है।

5. छठ पूजा का तीसरा दिन (सांझ अर्घ्य)

व्रती नदी किनारे जाकर सूर्य को संध्या अर्घ्य देता है। महिलाएं इसके बाद पीले रंग की साड़ी पहनती हैं। इस दिन रात में, भक्त छठी मैया के लोक गीत गाते हैं और पांच गन्नों के नीचे मिट्टी के दीये जलाकर कोसी (कोसिया भराई) भरते हैं। ये पांच गन्ने पंचतत्व (भूमि, वायु, जल, अग्नि और आकाश) का प्रतिनिधित्व करते हैं।

6. छठ पूजा का चौथा दिन

यह छठ पूजा का अंतिम दिन होता है जिसमें व्रती अपने परिवार और दोस्तों के साथ नदी किनारे सूर्य देवता को बिहानिया अर्घ्य (प्रातः काल की पूजा) देते हैं। अंतिम चरण में व्रती छठ पूजा के प्रसाद से अपना व्रत तोड़ते है।

7. छठ पूजा के विभिन्न चरण

छठ पूजा 6 पवित्र चरणों में पूरी होती है। पहला – शरीर और आत्मा की शुद्धता; दूसरा -अर्घ्य (सांझ और बिहानिया) के दौरान नदी के भीतर खड़ा होना जिसका मतलब है कि हमारा शरीर आधा पानी में और आधा पानी के बाहर होता है ताकि शरीर की सुषुम्ना को जगा सके। तीसरा – इस चरण में रेटिना और आँखों की नसों के द्वारा ब्रह्मांडीय सौर ऊर्जा को पीनियल, पिट्यूटरी और हाइपोथेलेमस ग्रंथियों (जिन्हें त्रिवेणी परिसर के रूप में जाना जाता है) में प्रविष्ट करवाया जाता है। चौथा -इस चरण में हमारे शरीर की त्रिवेणी परिसर सक्रिय हो जाती है। पांचवा – त्रिवेणी परिसर के सक्रिय होने के बाद रीढ़ की हड्डी तरंगित हो जाती है और भक्तो का शरीर लौकिक उर्जा से भर जाती है और कुंडलियां जागृत हो जाती है। छठा – यह शरीर और आत्मा की शुद्धि का अंतिम चरण है जिसमें शरीर रिसाइकिल होता है और समूचे ब्रह्माण्ड में अपनी ऊर्जा का प्रसार करता है।

8. छठ पूजा के पीछे वजह

रामायण और महाभारत दोनों में ही यह बात लिखी गयी है कि छठ पूजा सीता (राम के अयोध्याय लौटने पर) और द्रोपदी दोनों के द्वारा मनायी गई थी। इसके जड़ वेदो में भी समाहित है जिसमें मां उषा की पूजा का जिक्र है। इसमें कई मंत्र मां उषा को समर्पित है। यह भी लोक मान्यता है कि यह पूजा सबसे पहले सूर्य पुत्र कर्ण द्वारा की गयी थी।

9. सामान्यतः व्रती, जिन्हें पर्वतिन (संस्कृत शब्द पर्व यानी अनुष्ठान या त्यौहार) कहा जाता है, महिलाएं होती है। लेकिन अब पुरुष भी बड़े पैमाने पर इस त्योहार में हिस्सा लेते देखे जा रहे हैं। श्रद्धालु अपने परिजनों के कल्याण और समृद्धि के लिए यह पूजा करते हैं। इस पूजा की धार्मिक मान्यता कितनी प्रसिद्ध है इसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि इस त्योहार के दौरान भारत में श्रद्धालुओं के लिए विशेष ट्रेन चलायी जाती है।

10. यह पर्व सभी बिहारी और प्रवासी बिहारियों द्वारा मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, छत्तीसगढ़, गुजरात, कर्नाटक, मॉरिशस, फिजी, दक्षिण अफ्रीका, त्रिनदाद और टोबैगो, गयाना, सुरीनाम, जमैका, अमरीका, ब्रिटेन, आयरर्लैंड, आस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड, मलेशिया, मकाऊ, जापान और इंडोनेशिया में मनाया जाता है

Comments

No items found

Share on Facebook Share on twitter

Help-Line No. 9973159269  | 7004230135

Scroll to Top